क्षमा दानं क्षमा यज्ञः क्षमा सत्यं हि पुत्रिकाः |क्षमा यशः क्षमा धर्मः क्षमया विष्ठितं जगत् ||

— वाल्मीकिरामायणे बालकाण्डे त्रयस्त्रिंशस्सर्गः (8) कुशनाभ की पुत्रियों के नैतिक आचरण पर वायुदेव ने उनको कुबड़ी हो जाने का शाप दिया था । यद्यपि वे वायुदेव को प्रतिशापित कर सकतीं थीं, तथापि उन्होंने वायुदेव को क्षमादान दिया । अपनी पुत्रियों के इस सदाचरण पर कुशनाभ ने उप्परोक्त श्लोक से क्षमागुण को गौरान्वित किया । यदि…