नृशंसमनृशंसं वा प्रजारक्षणकारणात् । पातकं वा सदोषं वा कर्तव्यं रक्षता सता ॥

— वाल्मीकिरामायणे बालकाण्डे पञ्चविंशस्सर्गः (१८) राक्षसी ताड़का के वध का आदेश देते हुए ब्रह्मऋषि विश्वामित्र ने श्रीराम से कहा “क्षत्रिय का यह पहला कर्त्तव्य होता है कि वह अपने सभी लोगों की रक्षा करे। अपने कर्त्तव्य का पालन करते समय किसी के प्राण लेने पड़े तो उसे संकोच  नहीं करना चाहिए।” श्रीराम ने, बिना दुविधा…