सेवमाने दृढं सूर्ये दिशमन्तकसेविताम् | विहीनतिलकेव स्त्री नोत्तरा दिक् प्रकाशते ||

— वाल्मीकिरामायणे अरण्यकाण्डे षोडशस्सर्गः (८) हेमंत ऋतु का वर्णन करते हुए लक्ष्मण श्रीराम से कहते हैं “इस ऋतु में सूर्यदेव दक्षिण दिशा की ओर झुक जाते हैं । फलतः उत्तर दिशा का आकाश निष्प्राण एवं निरुत्साहित लगता है, स्त्री के तिलकरहित मुख के भाँति” । इस राम-लक्ष्मण संवाद से वर्त्तमान समाज, जहाँ मंदिरों में भी लोग…