पिता हि प्रभुरस्माकं दैवतं परमं हि नः | यस्य नो दास्यति पिता स नो भर्ता भविष्यति ||

— वाल्मीकिरामायणे बालकाण्डे द्वात्रिंशस्सर्गः (२२)

वायुदेव के विवाह प्रस्ताव पर कुशनाभ की पुत्रियों ने वायुदेव से कहा “हमारे पिता हमारे ईश्वर हैं और उनका हम पर पूर्ण अधिकार है । हमारे पति का चयन वे ही करेंगे ।” वायुदेव ने उन्हें, विवाह पश्चात, अमरत्व एवं चिरकालीन यौवन प्रदान करने का प्रलोभन भी दिया । वायुदेव के आकर्षक प्रस्ताव को अस्वीकार कर उन्होंने वायुदेव को लौटा दिया । कुशनाभ की पुत्रियों के आचरण व शब्दों से आज की युवा पीढ़ी को  एक महत्त्वपूर्ण शिक्षा मिलती है । अहंकारवश वे अपने सभी फैसले स्वयं ही लेने लगे हैं, मानो उनके माता-पिता का कोई अस्तित्व ही नहीं है । दूरदर्शन एवं चलचित्र के कार्यक्रम इस तरह के व्यवहार को प्रबलित कर रहे हैं ।

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